Sunday, 25 December 2011

एकांत की रागिनी.

ना दोपहर की धूप है,
ना रात की चांदनी.
ना घने बादल है,
ना प्यासी माटि .

ना खिलता यौवन है,
ना जाती जवानी.
ना 'उस' की कोई माया है,
ना वृद्ध की कोई वाणी.

ना उजड़ते बाग़ है,
ना खिलती क्यारी.
ना होटों की हंसी है,
ना आँखों का पानी.

ये है एकांत की कहानी,
      ये है एकांत की रागिनी.

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